न्यूज़ीलैंड और भारत ने इसी हफ़्ते सोमवार को एक नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफ़टीए) की घोषणा की थी. लेकिन न्यूज़ीलैंड की गठबंधन सरकार के एक पार्टनर ने भारत के साथ एफ़टीए को एक ख़राब समझौता क़रार दिया है.
न्यूज़ीलैंड की सरकार ने घोषणा करते हुए कहा था कि भारत के साथ हुए एफ़टीए से उसके 95 प्रतिशत निर्यात से टैरिफ़ या तो ख़त्म होगा या फिर कम होगा.
ख़ासकर कीवीफ्रूट, सेब, मीट, ऊन, कोयला और फॉरिस्ट्री पर. हालांकि डेयरी प्रोडक्ट पर टैरिफ़ में कटौती जिस तरह से न्यूज़ीलैंड चाहता था, वो नहीं हो पाई. डेयरी में न्यूज़ीलैंड को थोक शिशु फ़ॉर्मूला मिल्क और एक कोटा के तहत उच्च-मूल्य वाले मिल्क एल्ब्यूमिन्स पर 50 प्रतिशत टैरिफ कटौती मिली है.
सोमवार को जैसे ही इस समझौते की घोषणा की गई, उसी समय जारी एक बयान में न्यूज़ीलैंड फ़र्स्ट के नेता और वहाँ के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इसे देश के लिए एक ख़राब सौदा बताया.

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