चमोली जनपद के केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग में 5 हजार से ज्यादा पेड़ काटे जा रहे हैं. जल्द ही इस डिवीजन की तीन रेंज में इन हजारों पेड़ों का कटान पूरा हो जाएगा. हालांकि हरे पेड़ों पर आरियां चलाने के पीछे की वजह इस बार कोई विकास कार्य नहीं है, बल्कि केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग में हरियाली को बचाने के लिए ही इनकी बलि दी जा रही है. जानिए पूरा मामला.
उत्तराखंड में विकास कार्यों के लिए पेड़ों के कटान से जुड़ी खबरें सामने आती रहती हैं, जिन पर पर्यावरण प्रेमियों का विरोध भी देखने को मिलता है. लेकिन इस बार चमोली जनपद के केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग में होने जा रही हजारों पेड़ों के कटान का मामला कुछ अलग है. यहां पेड़ों को किसी सड़क, भवन या परियोजना के लिए नहीं, बल्कि जंगलों को आग से बचाने के उद्देश्य से काटा जा रहा है.
उत्तराखंड में कटेंगे 5 हजार से ज्यादा पेड़: केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग में कुल 5,184 हरे पेड़ों को काटने की मंजूरी दी गई है. यह कटान लगभग 19 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में किया जाएगा. 15 से 20 मीटर तक की चौड़ाई में आने वाले सभी पेड़ों का चिह्नीकरण किया जा चुका है. इस दायरे में आने वाले पेड़ गोपेश्वर रेंज, लोहबा रेंज गैरसैंण और धनपुर रेंज गोचर में स्थित हैं.
19 किलोमीटर लंबी फायर लाइन बनेगी: केदारनाथ फॉरेस्ट डिवीजन में एक फायर लाइन 14 किलोमीटर लंबी होगी, जबकि दूसरी 3 किलोमीटर और तीसरी 2 किलोमीटर लंबी फायर लाइन बनाई जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट से मिली पेड़ कटान को मंजूरी: गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हरे पेड़ों के कटान पर रोक लगा रखी है. इसी वजह से प्रदेश के कई इलाकों में फायर लाइन तैयार करने में दिक्कत आ रही थी. इस समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को भारत सरकार से अनुमति लेने के बाद फॉरेस्ट मैनेजमेंट के तहत सीमित और आवश्यक कटान को मंजूरी दी.
तीनों रेंज में पेड़ कटान शुरू हुआ: भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद उत्तराखंड वन विभाग ने पेड़ों का चिह्नीकरण कर लिया है. कटान का कार्य वन विकास निगम को सौंप दिया गया है. खास बात यह है कि इन तीनों रेंज में पेड़ों को काटने का काम शुरू भी कर दिया गया है. वन विभाग को इसमें तेजी इसलिए भी दिखानी पड़ रही है, क्योंकि फायर सीजन नजदीक है. उससे पहले फायर लाइन का तैयार होना बेहद जरूरी माना जा रहा है.
वनों को आग से बचाने का अभियान : इस बार 5 हजार से अधिक पेड़ों का कटान जरूर किया जा रहा है, लेकिन इसका उद्देश्य जंगलों को आग की विभीषिका से बचाना और लंबे समय में पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है.

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