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टाइगर स्टेट’ में बाघों को खतरा… अब सागर में मिला एक और बाघ का शव, 15 दिन में 7 की मौतTigers are under threat in the 'Tiger State'... Another tiger carcass found in Sagar, bringing the death toll to 7 in 15 days.

 

मध्य प्रदेश जिसे देश का ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है वहां एक बार फिर बाघ की मौत ने वन्यजीव संरक्षण पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सागर जिले के ढाना रेंज के हिलगन गांव के पास जंगल में एक टाइगर मृत अवस्था में मिला है. सुबह ग्रामीणों की नजर जब बाघ के शव पर पड़ी तो इलाके में हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की. दक्षिण वन मंडल की एसडीओ कविता जाटव के अनुसार बाघ के शरीर पर फिलहाल किसी तरह के चोट के निशान नहीं मिले हैं. यह पता लगाया जा रहा है कि बाघ कहां से आया था. यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में 2025 में अब तक 54 बाघों की मौत दर्ज हो चुकी है.


सूचना मिलते ही दक्षिण वन मंडल की टीम मौके पर पहुंची और शव का प्रारंभिक परीक्षण किया गया. दक्षिण वन मंडल की एसडीओ कविता जाटव ने बताया कि ढाना रेंज की हिलगन बीट के जंगल में बाघ का शव मिला है. शुरुआती जांच में बाघ के शरीर पर किसी भी तरह के बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं. उन्होंने कहा कि घटनास्थल से कुछ किलोमीटर की दूरी पर रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व स्थित है ऐसे में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि यह बाघ किस क्षेत्र से यहां पहुंचा और किस अभ्यारण का है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बाघ की मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा. विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि यह तय किया जा सके कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है या इसमें किसी तरह की साजिश या शिकार की भूमिका रही है. यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब मध्य प्रदेश में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं.

15 दिन में 7 बाघों की मौत

टाइगर स्टेट कहलाने वाले मध्य प्रदेश में बीते एक पखवाड़े में ही सात बाघों की मौत हो चुकी है. वर्ष 2025 में 28 दिसंबर तक प्रदेश में बाघों की मौत का आंकड़ा 55 तक पहुंच गया है जो प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद किसी एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा माना जा रहा है. आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 में 34, 2022 में 43, 2023 में 45 और 2024 में 46 बाघों की मौत दर्ज की गई थी. वहीं, केवल छह वर्षों में कुल 269 बाघों की मृत्यु हो चुकी है. इनमें से कई मौतें संजय दुबरी, बांधवगढ़, कान्हा, पेंच, सतपुड़ा, रातापानी और बालाघाट जैसे क्षेत्रों में सामने आई हैं.

57% अप्राकृतिक मौत के कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों की मौतों में बढ़ी संख्या रहस्यमयी है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 57 प्रतिशत मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुई हैं. इनमें अवैध शिकार, बिजली का करंट लगना, जहर देना और क्षेत्रीय संघर्ष जैसे कारण शामिल हैं. कई मामलों में शिकारियों द्वारा बाघों के पंजे काटकर ले जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बाघ की कीमत करोड़ों रुपये तक बताई जाती है. जिससे तस्करी का खतरा और बढ़ जाता है.

सागर के हिलगन गांव में मिला यह मृत बाघ भी इन्हीं चिंताओं को और गहरा करता है. अब सबकी नजरें वन विभाग की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह मौत प्राकृतिक थी या इसके पीछे कोई और वजह छिपी है.

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