मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के संयुक्त विरोध मार्च के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और ठाकरे बंधुओं के बीच सियासी टकराव और तेज हो गया है। मुंबई में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निकाले गए मार्च पर फडणवीस ने दोनों नेताओं पर तंज कसते हुए उन्हें ‘गजनी’ करार दिया।
फडणवीस ने कहा कि उद्धव और राज ठाकरे को यह याद रखना चाहिए कि ज्ञानेश कुमार 2025 में मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने, जबकि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में हो चुके थे। वहीं मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया 2026 में शुरू हुई। ऐसे में उनका सवाल था कि 2026 की प्रक्रिया और 2025 में नियुक्त हुए CEC को 2024 के विधानसभा चुनावों से कैसे जोड़ा जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने मार्च को ठाकरे बंधुओं की खोई राजनीतिक जमीन वापस हासिल करने की कोशिश बताया और दावा किया कि काफी प्रचार के बावजूद मार्च में अपेक्षित भीड़ नहीं जुटी। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से राजनीतिक अस्वीकार के बाद अब निर्वाचन आयोग को निशाना बनाया जा रहा है। ये फडणवीस के राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर विपक्ष की अपनी अलग दलील है।
उधर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने संयुक्त मार्च के जरिए SIR पर सवाल उठाए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। मार्च में कांग्रेस और शरद पवार गुट की NCP के नेता भी शामिल हुए। राज ठाकरे ने SIR को खत्म करने और भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग भी उठाई।
यानी महाराष्ट्र में मुद्दा अब सिर्फ मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं है। एक तरफ विपक्ष निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार इन सवालों को राजनीतिक जमीन वापस पाने की कवायद बता रही है। आने वाले दिनों में SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर यह टकराव और तेज होने के संकेत हैं।

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