नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था की तस्वीर में भारत की विकास संभावनाएं इस समय मजबूत दिखाई दे रही हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की सितंबर 2026 की Chief Economists’ Outlook रिपोर्ट में 74% मुख्य अर्थशास्त्रियों ने अगले 12 महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूत या बहुत मजबूत वृद्धि की उम्मीद जताई है। मई 2026 के सर्वे में यह आंकड़ा 52% था।
रिपोर्ट के मुताबिक 98% सर्वे किए गए अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि भारत की अर्थव्यवस्था अगले एक साल में कम से कम मध्यम गति से बढ़ेगी। भारत का ग्रोथ आउटलुक सर्वे में शामिल अर्थव्यवस्थाओं में सबसे मजबूत आंका गया है, जबकि दक्षिण-पूर्व एशिया में 73% अर्थशास्त्रियों ने मजबूत या बहुत मजबूत वृद्धि की उम्मीद जताई।
चीन को लेकर तस्वीर अपेक्षाकृत कमजोर हुई है। WEF के अनुसार करीब एक-तिहाई अर्थशास्त्री चीन में कमजोर वृद्धि की आशंका जता रहे हैं। यूरोप में स्थिति और दबाव वाली है, जहां 61% अर्थशास्त्रियों ने कमजोर या बहुत कमजोर वृद्धि की संभावना बताई। हालांकि इसे भारत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि की गारंटी नहीं माना जा सकता; यह विशेषज्ञों की अपेक्षाओं पर आधारित सर्वे है।
भारत के लिए घरेलू मांग को विकास का प्रमुख सहारा माना गया है। WEF ने 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान अगस्त में 6.7% किया था। हालांकि ऊंची ऊर्जा कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिमों को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती भी बताया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि मजबूत ग्रोथ आउटलुक के बावजूद बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए कारोबारी माहौल की रैंकिंग में भारत दूसरे से चौथे स्थान पर आया है। यानी ग्रोथ की उम्मीद मजबूत है, लेकिन निवेश माहौल को लेकर तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है।

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