मुंबई। टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग का रास्ता अब काफी हद तक साफ हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस की अपनी Core Investment Company (CIC) के रूप में रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी है। यह आवेदन कंपनी ने मार्च 2024 में किया था।
टाटा संस को सितंबर 2022 में RBI ने Upper Layer NBFC की श्रेणी में रखा था। इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों पर कड़े नियामकीय नियम लागू होते हैं, जिसमें शेयर बाजार में लिस्टिंग की शर्त भी शामिल है। टाटा संस ने NBFC ढांचे से बाहर निकलकर निजी और अनलिस्टेड कंपनी बने रहने का रास्ता तलाशा था, लेकिन RBI के ताजा फैसले से वह विकल्प बंद होता दिख रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
टाटा संस की अलग-अलग टाटा कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है। इसकी होल्डिंग में IT, ऑटोमोबाइल, स्टील, एविएशन, हॉस्पिटैलिटी और वित्तीय सेवाओं जैसे कई बड़े कारोबार शामिल हैं। ऐसे में अगर टाटा संस शेयर बाजार में आती है तो निवेशकों को पहली बार समूह की इस प्रमुख होल्डिंग कंपनी में सीधे हिस्सेदारी खरीदने का अवसर मिल सकता है।
लिस्टिंग के बाद कंपनी को नियमित वित्तीय खुलासे और सार्वजनिक शेयरधारकों के प्रति अधिक जवाबदेही निभानी होगी। इससे टाटा संस के निवेश, पूंजी आवंटन और उसकी विभिन्न कंपनियों में हिस्सेदारी की वास्तविक बाजार-आधारित तस्वीर पर भी ज्यादा नजर रहेगी।
हालांकि RBI का फैसला IPO की तारीख घोषित नहीं करता। अब असली सवाल यह है कि टाटा संस लिस्टिंग की प्रक्रिया किस तरीके से और कितनी तेजी से आगे बढ़ाती है। कंपनी की अगली रणनीति पर बाजार की नजर रहेगी।

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