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पति का PF और ग्रेच्युटी मिला, फिर भी नहीं मिलेगी फैमिली पेंशन! दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से समझें बड़ा नियम


पति की मौत के बाद पत्नी को प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी जैसे सभी अंतिम सेवा लाभ मिल जाएं, इसका मतलब यह नहीं कि उसे अपने आप फैमिली पेंशन का अधिकार भी मिल जाएगा। दिल्ली हाईकोर्ट के एक अहम फैसले ने साफ किया है कि पेंशन योजना में शामिल होने के लिए तय शर्तों और समय-सीमा का पालन जरूरी है।



मामला बैंक ऑफ महाराष्ट्र के कर्मचारी रमेश चंद की पत्नी सावित्री देवी से जुड़ा है। रमेश चंद ने 1985 में बैंक की सेवा ज्वाइन की थी और 12 फरवरी 2006 को सेवा के दौरान उनका निधन हो गया। उस समय वे अंशदायी भविष्य निधि व्यवस्था के अंतर्गत आते थे। बैंक ने उनकी पत्नी को PF और ग्रेच्युटी समेत अंतिम सेवा लाभों का भुगतान कर दिया था।


बाद में वर्ष 2010 में बैंक ने कुछ कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और मृत कर्मचारियों के परिवारों को एकमुश्त अवसर दिया कि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत पेंशन योजना का विकल्प चुन सकें। सावित्री देवी इस श्रेणी में पात्र थीं, लेकिन उन्हें तय समय-सीमा 18 अक्टूबर 2010 तक निर्धारित फॉर्म जमा करना था।


उन्होंने बाद में फॉर्म जमा करने का दावा किया, लेकिन समय पर आवेदन देने का कोई प्राप्ति प्रमाण या रिकॉर्ड पेश नहीं कर सकीं। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केवल पात्र होना पर्याप्त नहीं है, योजना की अनिवार्य शर्तों का पालन भी जरूरी है। अदालत ने यह भी माना कि वर्षों बाद किया गया दावा पुराने अधिकार को दोबारा जीवित नहीं कर सकता।


इस फैसले से बड़ा सबक यह है कि PF, ग्रेच्युटी और फैमिली पेंशन अलग-अलग लाभ हैं। किसी कर्मचारी या परिवार को पेंशन योजना का विकल्प मिलने पर समय-सीमा, आवेदन प्रक्रिया और रसीद जैसे दस्तावेजों को गंभीरता से संभालकर रखना चाहिए।

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