गुना/भोपाल। मध्यप्रदेश के गुना में रिटायर्ड IPS अधिकारी रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ जाति प्रमाणपत्र से जुड़े मामले में FIR दर्ज होने के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने धोखाधड़ी, गलत दस्तावेज के इस्तेमाल और संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। मामला वर्ष 1984 में विदिशा से जारी ST प्रमाणपत्र की वैधता और उसके आधार पर आरक्षण लाभ लेने के आरोपों से जुड़ा है।
जांच में सामने आया कि पुलिस सेवा में आने से पहले रघुवीर मीना सरकारी शिक्षक थे और उस समय उनके दस्तावेजों में OBC वर्ग दर्ज होने की बात सामने आई है। बाद में MPPSC के जरिए DSP पद के लिए उन्होंने ST वर्ग का प्रमाणपत्र इस्तेमाल किया। वर्ष 1986 में उनकी पुलिस सेवा में नियुक्ति हुई और वर्ष 2002 में उन्हें IPS अवॉर्ड मिला। संबंधित ST प्रमाणपत्र को शासन की उच्च स्तरीय छानबीन समिति पहले ही अमान्य घोषित कर चुकी है। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी हुआ और उसके आधार पर उन्हें कौन-कौन से लाभ मिले।
शिकायत राघौगढ़ निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी ने की थी। जांच में प्रमाणपत्र जारी होने की परिस्थितियों और संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है। रघुवीर मीना ने आरोपों को गलत बताया है।
FIR के बाद उनकी पत्नी और चांचौड़ा की पूर्व विधायक ममता मीना ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने वीडियो जारी कर कहा कि उनके परिवार को कार्रवाई से डराया नहीं जा सकता और “दो-चार केस और करा दो, डरेंगे नहीं” जैसी बात कही। उन्होंने 2029 का भी उल्लेख करते हुए जनता के बीच अपनी लड़ाई ले जाने की बात कही। सिंधिया पर लगाए गए राजनीतिक दबाव के आरोप फिलहाल ममता मीना के दावे हैं; FIR की कानूनी जांच अलग प्रक्रिया है।
अब पूरे मामले में तीन सवाल अहम हैं—ST प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी हुआ? OBC से ST वर्ग में बदलाव के दस्तावेज क्या थे? और प्रमाणपत्र अमान्य पाए जाने के बाद आरक्षण से मिले सेवा लाभों का कानूनी हिसाब कैसे होगा? इन सवालों के जवाब जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से सामने आएंगे।

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