सागर। जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद सागर जिले में शराब दुकानों के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा अब सड़क से दुकानों तक पहुंच गया है। बीना क्षेत्र के बारधा गांव में रविवार को महिलाओं और ग्रामीणों ने शराब दुकान में घुसकर तोड़फोड़ कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक हजारों शराब की बोतलें टूट गईं और दुकान के सीसीटीवी कैमरे भी क्षतिग्रस्त हुए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि गांव के बीच शराब दुकान चलने से घरेलू विवाद और सामाजिक परेशानी बढ़ रही है। उनका दावा है कि दुकान हटाने की मांग पहले भी की गई थी, लेकिन समाधान नहीं हुआ। इसी के बाद विरोध उग्र होने की बात सामने आई है।
दूसरी तरफ दुकान के मैनेजर राहुल सेन ने दावा किया कि तोड़फोड़ में करीब 20 से 25 लाख रुपये की शराब नष्ट हुई और काउंटर से 40-45 हजार रुपये नकद ले जाए गए। मैनेजर ने सरपंच राम नरेश सिंह राजपूत पर दुकान चलाने के बदले पैसे मांगने का आरोप भी लगाया। सरपंच ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ग्रामीणों का प्रदर्शन स्वतःस्फूर्त था और उनका तोड़फोड़ से संबंध नहीं था। पुलिस दोनों पक्षों के आरोपों की जांच कर रही है।
यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी महीने बंडा क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों के बाद सरकार ने कार्रवाई की थी। आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित और एक अधिकारी को मुख्यालय अटैच किया गया था। पुलिस स्तर पर बंडा टीआई और चौकी प्रभारी के निलंबन तथा शराब ठेकेदार समेत आरोपियों पर एफआईआर की रिपोर्ट भी सामने आई।
इसके बाद दो शराब दुकानों के लाइसेंस निरस्त किए गए और कुछ आरोपियों से जुड़ी संपत्तियों पर प्रशासनिक कार्रवाई की गई। 19 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार नकली शराब नेटवर्क में 37 गिरफ्तारियों और दिल्ली-ग्वालियर-सागर कनेक्शन की जांच की जानकारी भी सामने आई है।
फिर भी बारधा की घटना सरकार और प्रशासन के सामने नया सवाल खड़ा करती है—जब कार्रवाई हो चुकी है, तो ग्रामीणों को शराब दुकान हटाने के लिए खुद कानून हाथ में लेने की नौबत क्यों आई? अब पुलिस जांच के साथ यह भी देखना होगा कि दुकान के लाइसेंस, स्थान, ग्रामीणों की पूर्व शिकायतों और तोड़फोड़ के पीछे लगाए गए दोनों पक्षों के आरोपों में वास्तविक तथ्य क्या हैं।

Post a Comment