नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत के मामले में नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के संचालन पर रोक लगा दी, जिसमें छात्रा की हिरासत रद्द करने के साथ अधिकारियों से ₹5 लाख मुआवजा वसूलने का निर्देश दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मेधा रूपम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि NSA लगाने की प्रक्रिया केवल जिलाधिकारी के स्तर पर तय नहीं होती। उनके अनुसार प्रक्रिया SHO से शुरू होकर पुलिस अधिकारियों की रिपोर्ट, जिलाधिकारी, एडवाइजरी बोर्ड और फिर राज्य तथा केंद्र सरकार के स्तर तक जाती है। इसलिए केवल डीएम को जिम्मेदार ठहराने का सवाल उठता है।
अदालत ने भी मौखिक टिप्पणी में पूछा कि यदि निर्णय कई स्तरों से होकर आगे बढ़ा था तो डीएम को अलग करके ₹5 लाख की जिम्मेदारी कैसे दी जा सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने इसी मुद्दे पर हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर चुनौती पर हस्तक्षेप किया।
मामला अप्रैल 2026 में नोएडा के मजदूर प्रदर्शन के दौरान आकृति चौधरी की गिरफ्तारी और बाद में NSA के तहत हिरासत से जुड़ा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को हिरासत को रद्द करते हुए डीएम समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां की थीं।
सुप्रीम कोर्ट की रोक फिलहाल अंतरिम प्रकृति की है। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होने की जानकारी सामने आई है।

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