मेडिकल कॉलेज में दाखिले से जुड़ी दस्तावेजी जांच के दौरान स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि चार छात्राओं ने इसी श्रेणी के प्रमाणपत्रों के आधार पर MBBS में प्रवेश लिया था। जांच में प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए जाने के साथ संबंधित दस्तावेज भी अधूरे मिले। इसके बाद चारों के खिलाफ FIR दर्ज कर उनका प्रवेश निरस्त कर दिया गया।
मामला सामने आने के बाद संबंधित संस्थान और प्रशासन ने दस्तावेजों का सत्यापन कराया। जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई कि प्रमाणपत्र वास्तव में सक्षम प्राधिकारी की ओर से जारी किए गए थे या नहीं और दाखिले के समय प्रस्तुत किए गए दस्तावेज नियमों के अनुरूप थे या नहीं। सत्यापन में आपत्तियां सामने आने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
प्रशासनिक स्तर पर अब यह भी देखा जा रहा है कि इन प्रमाणपत्रों के आधार पर दाखिला लेने की प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भूमिका तो नहीं थी। फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की पुष्टि होने पर संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
चारों छात्राओं का MBBS प्रवेश रद्द किए जाने के बाद मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया में प्रमाणपत्रों के सत्यापन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खास तौर पर आरक्षित या विशेष श्रेणी के प्रमाणपत्रों की जांच दाखिले के शुरुआती चरण में कितनी गंभीरता से की जाती है, यह महत्वपूर्ण मुद्दा है।
हालांकि FIR दर्ज होना आरोप की शुरुआत है। मामले में छात्राओं की भूमिका और प्रमाणपत्रों की वास्तविक स्थिति का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

Post a Comment