मुंबई। टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग को लेकर टाटा समूह के दो बड़े शेयरधारकों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने लिस्टिंग का विरोध किया है, जबकि करीब 18.4% हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप ने इसका समर्थन किया है। यह स्थिति तब बनी है जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस की अपर-लेयर NBFC के रूप में रजिस्ट्रेशन खत्म करने की अर्जी खारिज कर दी और लागू नियामकीय नियमों का पालन करने को कहा।
SP ग्रुप के चेयरमैन शापूर मिस्त्री ने कहा है कि लिस्टिंग की दिशा अब स्पष्ट है। उनके मुताबिक इसका उद्देश्य किसी एक पक्ष की जीत नहीं, बल्कि टाटा संस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। दूसरी ओर, नोएल टाटा ने बोर्ड के सामने कहा कि लिस्टिंग से टाटा संस की विशिष्ट संस्थागत प्रकृति प्रभावित हो सकती है और RBI के आदेश को सीधे IPO का आदेश मानने पर भी सवाल उठाए।
मामले का आर्थिक पहलू भी अहम है। SP ग्रुप लंबे समय से टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचकर रकम जुटाने की कोशिश कर रहा है। 17 सितंबर को सामने आए प्रस्ताव में टाटा ट्रस्ट्स की ओर से SP ग्रुप की करीब ₹25,000 करोड़ की हिस्सेदारी मोनेटाइजेशन योजना पर चर्चा हुई थी, जिसमें हिस्सेदारी के एक हिस्से की बिक्री का रास्ता सुझाया गया था।
अब संभावित लिस्टिंग SP ग्रुप को अपनी हिस्सेदारी के बाजार मूल्य को अनलॉक करने का एक रास्ता दे सकती है। रिपोर्टों के अनुसार समूह पर कर्ज का दबाव भी है और उसकी टाटा संस हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा गिरवी रखा गया है। ऐसे में IPO का समर्थन उसके लिए वित्तीय तरलता के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

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