लखनऊ । बौद्धिक प्रतिकार
कोरोना महामारी का दौर भले ही खत्म हो चुका हो, लेकिन हिरासत में मौतों का मुद्दा अब भी अदालतों को चिंतित कर रहा है। गोंडा में 35 वर्षीय संजय कुमार सोनकर की कथित हिरासत में मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने आरपीएफ के दारोगा करण सिंह यादव और सिपाही अमित कुमार यादव की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए यह गंभीर टिप्पणी की।
मामला नवंबर 2025 का है। अभियोजन के अनुसार, गोंडा के मोतीगंज रेलवे स्टेशन क्षेत्र में मालगाड़ी से सरसों के तेल के छह डिब्बे चोरी होने की जांच में संजय का नाम सामने आया था। 4 नवंबर को आरपीएफ कर्मी उसे पूछताछ के लिए अपने साथ ले गए। अगले दिन उसके भाई को उसके शव के मुर्दाघर में होने की सूचना मिली।
अभियोजन का आरोप है कि हिरासत के दौरान संजय के साथ मारपीट की गई, जिससे उसकी मौत हुई। वहीं करण और अमित ने आरोपों से इनकार करते हुए खुद को गलत तरीके से फंसाए जाने की दलील दी। बचाव पक्ष ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों का हवाला देते हुए कहा कि वे मौत का कारण बनने वाली नहीं थीं।
हाईकोर्ट ने कहा कि इन चोटों और मौत के बीच संबंध का फैसला साक्ष्यों के आधार पर होगा। अदालत ने यह भी कहा कि हिरासत में मौत के मामलों में पुलिसकर्मियों पर आरोपों का खंडन करने के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करने का दायित्व होना चाहिए।

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