रिजर्व बैंक की विशेष स्वैप व्यवस्था बंद होते ही एनआरआई ग्राहकों को विदेशी मुद्रा जमा पर मिल रहा अतिरिक्त फायदा तेजी से कम होने लगा है। देश के कई प्रमुख बैंकों ने FCNR यानी विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा खातों पर ब्याज दरों में कटौती कर दी है। जिस बेहतर रिटर्न ने हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों और प्रवासी भारतीयों को आकर्षित किया था, अब वही आकर्षण कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।
बैंकों के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण आरबीआई की विशेष स्वैप विंडो का बंद होना माना जा रहा है। इस व्यवस्था के दौरान बैंकों को विदेशी मुद्रा जुटाने में एक खास सहूलियत मिली थी, जिसका फायदा ऊंची ब्याज दरों के रूप में एनआरआई जमाकर्ताओं तक पहुंचा। लेकिन सुविधा खत्म होते ही बैंकों ने भी अपने हाथ खींचने शुरू कर दिए।
इसका सीधा असर उन एनआरआई ग्राहकों पर पड़ सकता है, जो डॉलर, पाउंड, यूरो या अन्य विदेशी मुद्राओं में FCNR जमा के जरिए बेहतर रिटर्न की उम्मीद कर रहे थे। नई दरों के बाद पुराने और नए निवेशकों के बीच रिटर्न का अंतर भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि हर बैंक की ब्याज दरें, अवधि और मुद्रा के हिसाब से अलग-अलग हैं। इसलिए केवल पुराने आकर्षक रिटर्न देखकर निवेश का फैसला करना अब जोखिम भरा हो सकता है। एनआरआई ग्राहकों को नई FCNR दरों, अवधि और शर्तों की जांच करने के बाद ही जमा का फैसला करना चाहिए।

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