जबलपुर। सरकारी साइकिल योजना से जुड़े करीब एक दशक पुराने भ्रष्टाचार मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में देरी पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने EOW के महानिदेशक आईपीएस उपेंद्र जैन को व्यक्तिगत रूप से तलब किया और मामले की जांच निर्धारित समय में पूरी करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से EOW और लोकायुक्त की कार्यप्रणाली पर बेहद तल्ख मौखिक टिप्पणी भी सामने आई।
मामला रायसेन जिले के बरेली क्षेत्र के एक स्कूल में वर्ष 2013-14 की साइकिल योजना से जुड़ा है। आरोप है कि पात्र विद्यार्थियों के लिए आई राशि में से आठ छात्रों की रकम उन्हें नहीं मिली। करीब 19,200 रुपए की इस राशि के अलग-अलग चेक अन्य लोगों के नाम से निकाले जाने का आरोप है।
EOW ने 7 दिसंबर 2015 को अपराध क्रमांक 41/2015 में छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। मूल चालान वर्ष 2018 में पेश किया गया। मामले में कुछ आरोपियों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई भी पूरी हो चुकी है, लेकिन दो याचिकाकर्ताओं के संबंध में अभियोजन स्वीकृति और दस्तावेजों की प्रक्रिया लंबे समय तक अटकी रही।
हाईकोर्ट ने इस देरी पर सवाल उठाते हुए EOW से जवाब मांगा। DG उपेंद्र जैन की ओर से पेश जवाब में विभागीय स्वीकृति के मूल दस्तावेज उपलब्ध न होने और उनकी पुष्टि में समय लगने को देरी का कारण बताया गया।
अब कोर्ट ने जांच पूरी करने के लिए 60 दिन की समयसीमा तय की है। सवाल यह है कि इतने पुराने मामले में कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई और स्वीकृति मिलने के बाद भी मामला वर्षों तक क्यों लटका रहा?

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