नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने न्यायपालिका की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि उसकी सबसे बड़ी ताकत केवल संवैधानिक अधिकार या कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि जनता का भरोसा है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता तभी कायम रह सकती है, जब आम नागरिक को यह विश्वास हो कि अदालतें निष्पक्षता से न्याय करेंगी।
CJI ने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है और उसके प्रति लोगों का विश्वास उसकी संस्थागत ताकत को मजबूत करता है। अदालतों के फैसलों का प्रभाव केवल संबंधित पक्षों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वे कानून के शासन और संवैधानिक व्यवस्था में जनता के विश्वास को भी प्रभावित करते हैं।
उन्होंने न्यायिक संस्थाओं के सामने मौजूद चुनौतियों का उल्लेख करते हुए पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि बदलते समय के साथ न्यायपालिका को नागरिकों की अपेक्षाओं और नई कानूनी चुनौतियों के अनुरूप खुद को मजबूत करते रहना होगा।
CJI की यह टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब न्यायपालिका के फैसले सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई संवेदनशील मामलों में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। अदालतों से जुड़े फैसलों पर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज होती है। ऐसे माहौल में न्यायपालिका की निष्पक्षता और संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर जनता का विश्वास बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी है।
संदेश साफ है—न्यायपालिका की प्रतिष्ठा केवल उसके आदेशों से नहीं, बल्कि उन आदेशों के प्रति आम नागरिक के भरोसे से तय होती है।

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