मुंबई। विशेष रिपोर्ट | आयाम बजाज
दिशा सालियान की मौत से जुड़े छह साल पुराने मामले ने सितंबर 2026 में नया मोड़ ले लिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच में सामने आए ठोस साक्ष्य के आधार पर ही किसी व्यक्ति को आरोपी माना जाए।
अब जांच का अहम हिस्सा मुंबई पुलिस की पुरानी जांच और उसके रिकॉर्ड हैं। CBI ने मालवणी पुलिस से केस से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगे हैं। जांच एजेंसी पुलिस अधिकारियों के बयान, पुराने कागजात, पोस्टमार्टम व फॉरेंसिक सामग्री, घटनास्थल तथा शुरुआती जांच की कार्रवाई को भी खंगाल रही है।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठता है—2020 में हुई जांच में क्या-क्या दर्ज हुआ, क्या छोड़ा गया और किन अधिकारियों ने कौन-से फैसले लिए? उपलब्ध रिपोर्टों में तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और पुलिस कमिश्नर स्तर तक की भूमिकाओं को लेकर शिकायतों और आरोपों का उल्लेख है। CBI अब इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच कर सकती है।
दिशा के पिता सतीश सालियान ने मामले में हत्या समेत गंभीर आरोप लगाए हैं। CBI FIR में कई लोगों की भूमिकाओं की जांच का उल्लेख है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी ठहराना कानूनन उचित नहीं होगा।
सबसे अहम बात यह है कि अब सवाल सिर्फ दिशा की मौत की परिस्थितियों का नहीं, बल्कि पहली जांच कितनी पारदर्शी थी और पुलिस रिकॉर्ड में क्या दर्ज हुआ था, इसका भी है। यही फाइलें आगे की CBI जांच की दिशा तय कर सकती हैं।

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