नई दिल्ली। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक विकास के सामने खड़ी पर्यावरणीय चुनौती को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। भारत मंडपम में जुटे BRICS देशों के नेताओं के बीच मोदी ने कहा कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि पूरक हैं। यानी आर्थिक तरक्की की कीमत प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर नहीं चुकाई जा सकती।
12–13 सितंबर को आयोजित सम्मेलन भारत की BRICS अध्यक्षता में हो रहा है। इस बार इसकी थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी गई है, जिसमें टिकाऊ विकास को वैश्विक सहयोग के साथ जोड़ा गया है।
सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और ईरान, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका समेत BRICS के अन्य सदस्य देशों के नेता मौजूद हैं। भारत की मेजबानी में हो रही बैठक का एजेंडा केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सहयोग, आपूर्ति शृंखला, स्वास्थ्य, तकनीक और विकासशील देशों की भूमिका जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में हैं।
मोदी का पर्यावरण संबंधी संदेश ऐसे समय आया है जब दुनिया तेज आर्थिक विकास के साथ जलवायु संकट, प्राकृतिक आपदाओं और संसाधनों के बढ़ते दबाव का सामना कर रही है। BRICS नेताओं ने सम्मेलन में सतत विकास और वैश्विक स्तर पर सहयोग को लेकर साझा प्रतिबद्धता भी जताई है।
अब चुनौती बयान को जमीन पर उतारने की है। बड़े प्रोजेक्ट, उद्योग और शहरी विस्तार जरूरी हैं, लेकिन उनकी पर्यावरणीय कीमत कौन चुकाएगा—यह सवाल हर विकास मॉडल के सामने खड़ा रहेगा।

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