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दिल्ली में दिखा नया ‘वर्ल्ड ऑर्डर’, BRICS में भारत की कूटनीतिक बढ़त—आतंकवाद से टैरिफ तक बनी सहमति

 

नई दिल्ली। नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के बाद जारी ‘नई दिल्ली घोषणा पत्र’ ने वैश्विक राजनीति में बदलते शक्ति-संतुलन का संकेत दिया है। 45 पन्नों के इस दस्तावेज में आतंकवाद, वैश्विक व्यापार, संयुक्त राष्ट्र सुधार, पश्चिम एशिया के संघर्ष और विकासशील देशों की भूमिका जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों ने साझा रुख सामने रखा



भारत के लिए सबसे अहम उपलब्धि आतंकवाद के मोर्चे पर मानी जा रही है। BRICS देशों ने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के सभी रूपों, सीमा पार आतंकवाद, आतंक की फंडिंग और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात कही। घोषणा में आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से जोड़ने का भी विरोध किया गया।


संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के मुद्दे पर भी भारत को महत्वपूर्ण समर्थन मिला। घोषणा पत्र में विकासशील देशों की बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग की गई है। चीन और रूस ने भारत और ब्राजील की UNSC में बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन दोहराया। यह भारत की लंबे समय से चली आ रही स्थायी सदस्यता की दावेदारी के लिए अहम राजनीतिक संकेत है।


आर्थिक मोर्चे पर BRICS ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर चिंता जताते हुए WTO व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई। वहीं स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान को बढ़ावा देने पर भी जोर रहा।


यानी दिल्ली में सिर्फ एक शिखर सम्मेलन नहीं हुआ—BRICS ने यह संदेश दिया कि वैश्विक फैसलों में ग्लोबल साउथ की आवाज अब दर्शक की नहीं, हिस्सेदार की होगी।

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