सी बकथॉर्न इन दिनों स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी चर्चाओं में नजर आता है। यह एक कांटेदार झाड़ी पर लगने वाला नारंगी रंग का छोटा फल है, जो ठंडे और पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है। भारत में इसकी खेती और उपलब्धता खासतौर पर हिमालयी क्षेत्रों में देखी जाती है। इसका स्वाद खट्टा होता है और इसे जूस, पल्प तथा अन्य खाद्य उत्पादों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
इस फल को पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसमें विटामिन-सी, विटामिन-ई और कुछ अन्य विटामिन के साथ पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे खनिज भी पाए जाते हैं। इसमें प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और विभिन्न वनस्पति यौगिक भी मौजूद होते हैं। हालांकि पोषक तत्वों की मात्रा फल की किस्म और उसे तैयार करने के तरीके के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
सी बकथॉर्न का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं और इसके सेवन की बात सामने आने के बाद लोगों की दिलचस्पी इस फल में बढ़ी। हालांकि किसी एक खाद्य पदार्थ को स्वास्थ्य के लिए चमत्कारी मानना सही नहीं है। इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाना ही बेहतर है।
अगर आप सी बकथॉर्न को जूस या किसी अन्य रूप में लेना चाहते हैं तो उसकी मात्रा और उत्पाद की गुणवत्ता पर ध्यान दें। खासकर किसी बीमारी, दवा के सेवन या विशेष आहार की स्थिति में इसे नियमित रूप से लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।

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