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मिडिल ईस्ट में जंग, फिर भी भारत बेअसर! जयशंकर ने बताया कैसे संभाली तेल-गैस और भारतीयों की सुरक्षा



नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर रणनीति में कोई ढिलाई नहीं बरती। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को पश्चिम एशिया संबंधों पर हुई संसदीय परामर्श समिति की बैठक में सरकार की तैयारियों और कूटनीतिक प्रयासों की जानकारी दी। 


बैठक में जयशंकर ने कहा कि संघर्ष के बावजूद भारत ने ऊर्जा आपूर्ति को जारी रखने और जरूरी सामान की उपलब्धता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया। सरकार का प्रयास रहा कि युद्ध का असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जरूरतों तक न्यूनतम पहुंचे। साथ ही खाड़ी देशों में रहने वाले बड़ी संख्या में भारतीयों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई। 


जयशंकर के मुताबिक भारत संकट के बीच तेल और ऊर्जा के स्रोतों में विविधता लाने पर भी काम कर रहा है, ताकि किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता न रहे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत के अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संबंध हैं, जिससे बदलते पश्चिम एशियाई समीकरणों के बीच भारत के पास संवाद और कूटनीति के कई रास्ते खुले हैं। 


बैठक में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, समुद्री सहयोग और प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कुछ सांसदों ने पश्चिम एशिया में बदलते सुरक्षा समीकरणों और मक्का समझौते को लेकर भी सवाल उठाए।


कुल मिलाकर भारत की रणनीति स्पष्ट दिखाई देती है—युद्ध में किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने के बजाय अपने नागरिकों, ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देना। यही संतुलित कूटनीति फिलहाल भारत को पश्चिम एशिया के संकट के बीच अपेक्षाकृत सुरक्षित रखने में मदद कर रही है।

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