
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति की स्थापना को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहता है। बाजार में तरह-तरह की मूर्तियां उपलब्ध हैं, लेकिन मूर्ति खरीदते समय कई लोग ऐसी बातों को लेकर उलझ जाते हैं जिन्हें परंपरा और धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर देखा जाता है।
सबसे ज्यादा चर्चा गणेशजी की सूंड की दिशा को लेकर होती है। आम घरेलू पूजा के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को शुभ और अपेक्षाकृत सरल पूजा वाला माना जाता है। वहीं दाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा को कई परंपराओं में विशेष विधि-विधान से जोड़ा जाता है। हालांकि यह मुख्यतः धार्मिक मान्यता है, कोई सार्वभौमिक वैज्ञानिक नियम नहीं।
मूर्ति का आसन और मुद्रा भी श्रद्धा के अनुसार चुनी जाती है। घर में स्थापना के लिए बैठे हुए गणेशजी की प्रतिमा को कई परिवार शुभ मानते हैं। मूर्ति में गणेशजी के साथ उनका वाहन मूषक और हाथ में मोदक जैसे पारंपरिक प्रतीक हों, तो प्रतिमा का धार्मिक स्वरूप और स्पष्ट होता है।
रंग को लेकर भी कई मान्यताएं हैं। लाल और सिंदूरी रंग को गणेश पूजा में विशेष महत्व दिया जाता है। लेकिन मूर्ति का रंग अपने आप में शुभ-अशुभ तय करने वाला कोई स्थापित नियम नहीं है।
सबसे जरूरी बात है कि मूर्ति पर्यावरण के अनुकूल सामग्री, खासकर प्राकृतिक मिट्टी से बनी हो। प्लास्टर ऑफ पेरिस और ऐसे रंगों से बनी मूर्तियां विसर्जन के बाद जलस्रोतों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
इसलिए गणपति की मूर्ति खरीदते समय केवल आकार, सजावट या रंग न देखें। श्रद्धा के साथ परंपरा, पूजा की सुविधा और पर्यावरण—तीनों का ध्यान रखना ही बेहतर विकल्प है।
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