मुंबई। 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह इस बार राजधानी दिल्ली में नहीं, बल्कि गुजरात के एकता नगर में आयोजित होगा। समारोह 22 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में होगा और वह पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित करेंगी। सात दशक से अधिक पुरानी परंपरा में यह बड़ा बदलाव है। समारोह आम तौर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होता रहा है।
समारोह का स्थान बदलने पर राजनीति भी गरमा गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि राष्ट्रीय स्तर के ऐसे कार्यक्रम मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु या दूसरे राज्यों की राजधानियों में क्यों नहीं हो सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र गुजरात और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक तरह की दीवार खड़ी करने की कोशिश कर रहा है।
पार्टी सांसद संजय राउत ने इससे भी तीखा रुख अपनाते हुए समारोह के बहिष्कार की अपील की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री केवल गुजरात के प्रधानमंत्री हैं। राउत ने दावा किया कि गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले समारोह का स्थान बदलना राजनीतिक उद्देश्य से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और सरकार की ओर से स्थान बदलने के पीछे ऐसा कोई कारण आधिकारिक रूप से नहीं बताया गया है।
एकता नगर यानी केवड़िया स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के लिए जाना जाता है। सरकार की ओर से समारोह को वहां आयोजित करने के फैसले को लेकर अभी तक कोई विस्तृत राजनीतिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में विवाद का केंद्र अब यही सवाल है—राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का मंच दिल्ली से बाहर ले जाना सांस्कृतिक विकेंद्रीकरण है या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश भी छिपा है?

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