फैटी लिवर होने पर सबसे ज्यादा ध्यान सिर्फ तेल-मसाले पर नहीं, बल्कि कुल कैलोरी, वजन, चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पर देना जरूरी होता है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि रोज के भोजन में रोटी बेहतर है या चावल।
विशेषज्ञों के अनुसार फैटी लिवर में रोटी या चावल दोनों पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं हैं। फर्क उनकी मात्रा और किस तरह के अनाज का इस्तेमाल किया जा रहा है, इससे पड़ता है। मैदा या अत्यधिक रिफाइंड अनाज की जगह साबुत अनाज और ज्यादा फाइबर वाले विकल्प बेहतर हो सकते हैं। चावल खाते हैं तो मात्रा नियंत्रित रखना और संभव हो तो ब्राउन राइस जैसे कम रिफाइंड विकल्प चुनना मददगार हो सकता है।
रोटी के मामले में भी बहुत ज्यादा घी, मक्खन या तेल डालने से बचना चाहिए। प्लेट में केवल कार्बोहाइड्रेट बढ़ाने के बजाय सब्जियां, दाल, चना, पनीर या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत शामिल करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
फैटी लिवर में वजन अधिक होने पर धीरे-धीरे वजन कम करना भी लिवर की सेहत में सुधार से जुड़ा है। इसलिए सवाल केवल “रोटी या चावल?” का नहीं, बल्कि पूरी डाइट के संतुलन का है। व्यक्ति की बीमारी की गंभीरता, वजन और दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों के अनुसार डाइट अलग हो सकती है, इसलिए डॉक्टर या योग्य डायटीशियन की सलाह लेना बेहतर रहता है।

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