श्रीनगर। कश्मीरी हिंदुओं ने अपने विस्थापन और घाटी में वापसी के मुद्दे को फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाने की मांग की है। बलिदान दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि केवल पुनर्वास पैकेज या आर्थिक सहायता से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनके लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी के साथ राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक सुरक्षा की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है।
कार्यक्रम में कश्मीरी हिंदुओं ने घाटी में वापसी के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करने की मांग की। साथ ही अलग और सुरक्षित होमलैंड की मांग को भी दोहराया गया। प्रतिनिधियों का कहना था कि दशकों पहले हुए पलायन के बाद विस्थापित परिवारों की नई पीढ़ियां भी अपनी जड़ों से जुड़ाव महसूस करती हैं, लेकिन वापसी को लेकर सुरक्षा और भविष्य की अनिश्चितता अभी बड़ी चुनौती है।
समुदाय की ओर से कश्मीरी हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा और विस्थापन को आधिकारिक रूप से दर्ज करने तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग भी उठी। इसी क्रम में प्रस्तावित 'जीनोसाइड बिल' लाने की मांग को भी प्रमुखता दी गई, ताकि कथित नरसंहार और विस्थापन की घटनाओं की कानूनी परिभाषा, जांच और जवाबदेही तय हो सके।
कश्मीरी हिंदुओं का कहना है कि उनकी वापसी केवल घर लौटने का सवाल नहीं, बल्कि सुरक्षा, न्याय, संपत्ति के अधिकार और सम्मान के साथ पुनर्स्थापना का विषय है। अब सवाल यही है कि सरकार उनकी इन मांगों पर ठोस नीति और समयबद्ध रोडमैप कब सामने लाती है।

Post a Comment