भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव और हनुमानजी की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। मंगलवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष भौम प्रदोष कहलाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर भगवान शिव के साथ हनुमानजी की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना की जाती है।
मान्यता है कि भौम प्रदोष के दिन शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव का जल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक करना शुभ होता है। इसके बाद हनुमानजी के मंदिर में जाकर सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित कर पूजा की जा सकती है। हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ भी किया जाता है।
अविवाहित युवक-युवतियां विवाह की मनोकामना से शिव-पार्वती की पूजा कर सकते हैं। वहीं विवाहित लोग सुखी दांपत्य और पारिवारिक शांति के लिए भगवान शिव और हनुमानजी का स्मरण करते हैं।
हालांकि, विवाह बाधा दूर होने की बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इनका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। पूजा-व्रत को आस्था और आध्यात्मिक साधना के रूप में करना उचित है।
ध्यान रखें: प्रदोष व्रत की तिथि और प्रदोष काल का सही समय स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार पूजा का मुहूर्त निर्धारित करें।

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