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बंडा में मौतों का कहर, अब अफसरों से सवाल—मोहन सरकार क्या कर रही है?

नकली शराब की शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं? कलेक्टर प्रतिभा पाल और एसपी अनुराग सुजानिया के सामने बड़ी चुनौती



सागर। बंडा क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों ने मध्यप्रदेश की आबकारी व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार को सामने आए इस घटनाक्रम में मौतों का आंकड़ा अलग-अलग रिपोर्टों में लगातार बदल रहा है। ताजा रिपोर्टों में नौ से अधिक मौतों की सूचना सामने आई है, जबकि कई लोग अस्पतालों में उपचाररत बताए जा रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ा अभी स्पष्ट होना बाकी है।


सबसे बड़ा सवाल केवल मौतों का नहीं, बल्कि कार्रवाई में देरी का है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कथित तौर पर ‘बाम्बे व्हिस्की’ नाम से नकली शराब बेचे जाने की शिकायत आबकारी विभाग तक पहले पहुंच चुकी थी। इसके बावजूद यदि अवैध शराब का कारोबार जारी रहा और अब लोगों की जान चली गई, तो यह जांच का विषय है कि शिकायत पर किस अधिकारी ने क्या कार्रवाई की?


सागर जिले की प्रशासनिक कमान कलेक्टर प्रतिभा पाल के पास है, जबकि पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया हैं। जिला प्रशासन की आधिकारिक सूची में दोनों अधिकारियों के नाम दर्ज हैं। घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं तथा जांच शुरू की गई है।


अब सवाल मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार से है—अगर नकली शराब की शिकायत पहले से थी तो जिम्मेदारी किसकी है? संबंधित आबकारी अधिकारियों ने निरीक्षण क्यों नहीं किया? शराब का स्रोत क्या था? इसे किसने बनाया और किसने बाजार तक पहुंचाया? और यदि विभागीय स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी?


बंडा की घटना अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गई है। यह सरकारी निगरानी, आबकारी तंत्र और जवाबदेही की परीक्षा है। मौतों की अंतिम संख्या और कारण पोस्टमार्टम तथा जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होंगे, लेकिन सरकार को यह भी बताना होगा कि कथित शिकायत के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

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