नई दिल्ली। पूरे हफ्ते काम की भागदौड़ के बाद वीकेंड पर बिस्तर में पड़े रहना और देर तक सोना आरामदायक जरूर लगता है, लेकिन अगर यही सिलसिला पूरे दिन चलता रहे तो शरीर की नियमित गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। आराम और निष्क्रियता के बीच फर्क समझना जरूरी है। शरीर को रिकवरी के लिए नींद चाहिए, लेकिन लंबे समय तक बिल्कुल सक्रिय न रहना कई तरह की परेशानियों को बढ़ा सकता है।
सारा दिन लेटे रहने से शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे शरीर में जकड़न, पीठ या गर्दन में अकड़न और सुस्ती महसूस हो सकती है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से रक्त संचार भी प्रभावित हो सकता है। वहीं लगातार निष्क्रिय रहने की आदत वजन बढ़ने और फिटनेस कम होने से जुड़ी हो सकती है।
वीकेंड पर जरूरत से ज्यादा सोने की आदत भी नींद के सामान्य रूटीन को बिगाड़ सकती है। अगर सप्ताह के दिनों में कम नींद पूरी होती है और छुट्टी के दिन बहुत देर तक सोकर इसकी भरपाई की जाती है, तो रात में समय पर नींद आने में परेशानी हो सकती है।
आराम करना गलत नहीं है। बेहतर तरीका यह है कि पर्याप्त नींद लेने के बाद दिन में हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग या घर के सामान्य काम किए जाएं। लंबे समय तक लगातार बैठने या लेटने के बजाय बीच-बीच में उठकर कुछ मिनट चलना भी उपयोगी है।
वीकेंड को पूरी तरह आलस में बिताने के बजाय आराम और गतिविधि के बीच संतुलन रखना शरीर के लिए ज्यादा बेहतर हो सकता है।

Post a Comment