विशेष रिपोर्ट | प्रणव बजाज
इंदौर। अगस्त में नाबालिग को कोकीन का सेवन कराने के आरोपों से शुरू हुआ मामला अब विदेशी तस्करों, स्थानीय पैडलरों और मुंबई कनेक्शन तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। चंदन नगर पुलिस ने 57.18 ग्राम कोकीन के साथ नाइजीरियाई महिला इम्यूनल जॉय को पकड़ा था। पुलिस के अनुसार वह मुंबई से इंदौर डिलीवरी के लिए आई थी और उसके मोबाइल व संपर्कों की जांच की गई।
इसके बाद मुंबई से जुड़े दो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और अब नारकोटिक्स विंग द्वारा स्थानीय स्तर पर कोकीन के साथ कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या इंदौर में कोकीन की सप्लाई केवल कुछ पैडलरों तक सीमित है या इसके पीछे ग्राहकों और सप्लायरों का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है?
ताजा कार्रवाई में आजाद नगर निवासी समीर खान से 21.70 ग्राम कोकीन बरामद होने की जानकारी सामने आई है। उसके मोबाइल से पुलिस को नेटवर्क की कड़ियां मिलने की उम्मीद है। चैट, संपर्क नंबर और डिजिटल लेनदेन सामने आते हैं तो यह पता चल सकता है कि कोकीन किन लोगों तक पहुंच रही थी।
पहले की पुलिस जांच से जुड़े मीडिया रिपोर्टों में शहर के धनाढ्य वर्ग के संभावित ग्राहकों और ₹20-25 हजार प्रति ग्राम तक के कथित दाम का उल्लेख हुआ है। हालांकि किसी व्यक्ति को ग्राहक या आरोपी बताने के लिए पुलिस की आधिकारिक पुष्टि जरूरी होगी।
यही वह बिंदु है जहां जांच की असली परीक्षा शुरू होती है। पुलिस केवल पैडलरों को पकड़कर रुकती है या मोबाइल और वित्तीय जांच के जरिए सप्लाई चेन के अंतिम खरीदारों और बड़े सप्लायरों तक पहुंचती है?
इसी क्रम में अगस्त में प्रकाशित रिपोर्टों में भाजपा सांसद शंकर लालवानी से जुड़े बताए गए गगन खुबानी के बेटे कृष्णा खुबानी पर नाबालिग को कथित तौर पर कोकीन का सेवन कराने के आरोप लगाए गए थे। ये आरोप मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं और इनकी न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है।
बाद की रिपोर्ट में कृष्णा खुबानी के कथित सहयोगी देवांश सुगवानी की गिरफ्तारी और उसके मोबाइल की जांच का भी उल्लेख हुआ।
इस पूरे मामले में सांसद शंकर लालवानी की कोई प्रत्यक्ष भूमिका या पुलिस कार्रवाई रोकने का प्रमाण उपलब्ध स्रोतों से स्थापित नहीं होता। इसलिए असली सवाल किसी राजनीतिक व्यक्ति पर आरोप लगाने से ज्यादा पुलिस जांच की निष्पक्षता और उसकी पहुंच का है।
अब पुलिस के सामने तीन स्पष्ट सवाल हैं—मोबाइल में कौन-कौन से नंबर निकलते हैं? मुंबई से इंदौर तक माल कौन पहुंचाता है? और जिनके पास ₹20-25 हजार ग्राम वाली कोकीन पहुंच रही है, क्या जांच वहां तक जाएगी?
अगर मोबाइल डेटा, आर्थिक लेनदेन और आरोपियों के संपर्कों की कड़ियां जुड़ती हैं, तो संभव है कि अब तक सामने आए पैडलरों से कहीं बड़े नेटवर्क की तस्वीर सामने आए।

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