कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने कम छात्र संख्या और अपर्याप्त बुनियादी ढांचे वाले करीब 250 सरकारी मान्यता प्राप्त निजी मदरसों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का सैद्धांतिक फैसला लिया है। सरकार के अनुसार इन संस्थानों में छात्रों का नामांकन बेहद कम है और कई जगह आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इन मदरसों को दिसंबर तक कक्षाएं चलाने की अनुमति दी जाएगी, ताकि वर्तमान में पढ़ रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई अचानक प्रभावित न हो।
यह कार्रवाई सितंबर में शुरू हुए व्यापक सत्यापन अभियान के बाद सामने आई है। इससे पहले राज्य सरकार ने 252 मदरसों को बंद करने के नोटिस दिए थे और करीब 100 अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। निरीक्षण में कक्षाओं की कमी, पर्याप्त शिक्षक या विद्यार्थी नहीं होना, निर्धारित पाठ्यक्रम से विचलन और अन्य नियामकीय कमियां सामने आने की बात कही गई।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार सर्वे में करीब 2,132 मदरसे पंजीकृत/मान्य पाए गए, जबकि 2,396 मदरसों के पास आवश्यक सरकारी पंजीकरण या संबद्धता नहीं होने की बात सामने आई। सरकार ने संकेत दिया है कि दिसंबर के बाद भी ऐसे और संस्थानों पर कार्रवाई हो सकती है।
सरकार का तर्क है कि विद्यार्थियों को पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं और आधुनिक पाठ्यक्रम वाली शिक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है। दूसरी ओर, आगे की कार्रवाई में प्रत्येक संस्थान की स्थिति और लागू नियमों के आधार पर अलग-अलग प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

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