मुंबई। महाराष्ट्र में आगामी नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की कथित गाइडलाइन चर्चा में है। संगठन की ओर से आयोजकों से गरबा आयोजनों में प्रवेश व्यवस्था को लेकर कई सुझाव दिए गए हैं, जिनमें पहचान की जांच और तिलक लगाने जैसी शर्तें शामिल होने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ आयोजनों में प्रवेश के लिए आधार कार्ड दिखाने और माथे पर तिलक लगाने को अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा वीएचपी ने आयोजकों से मुस्लिम समुदाय के लोगों को गरबा आयोजनों में प्रवेश नहीं देने की अपील किए जाने की बात भी सामने आई है।
इन दिशा-निर्देशों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस शुरू हो गई है। समर्थकों का तर्क है कि धार्मिक आयोजनों की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आयोजकों को अपनी प्रवेश व्यवस्था तय करने का अधिकार होना चाहिए। वहीं आलोचकों का कहना है कि किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान के आधार पर सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रवेश रोकना भेदभावपूर्ण हो सकता है।
महाराष्ट्र में नवरात्रि के दौरान मुंबई समेत कई शहरों में बड़े स्तर पर गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे में आयोजकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और प्रवेश जांच महत्वपूर्ण मुद्दे रहते हैं।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि स्थानीय प्रशासन इन कथित दिशा-निर्देशों को लेकर क्या रुख अपनाता है और आयोजक प्रवेश व्यवस्था के संबंध में कौन से नियम लागू करते हैं।

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