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‘फिक्सर’ वकीलों के बिना नहीं हो सकता भ्रष्टाचार? महेश जेठमलानी बोले- कॉलेजियम तक पहुंचनी चाहिए जानकारी



नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ऐसे कथित ‘फिक्सर’ वकील, जो मामलों को प्रभावित कराने या न्यायिक प्रक्रिया में अनुचित दखल के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं, भ्रष्टाचार के नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं।


जेठमलानी के मुताबिक बार में काम करने वाले लोग ऐसे वकीलों के बारे में जानते हैं और संभव है कि खुफिया एजेंसियों के पास भी उनकी जानकारी मौजूद हो। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी सूचनाओं को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के सामने रखा जाना चाहिए, ताकि न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।


उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। जेठमलानी ने संकेत दिया कि यदि किसी वकील की भूमिका न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने या किसी मामले में अनुचित लाभ दिलाने के लिए बतौर ‘फिक्सर’ सामने आती है, तो इसकी जानकारी संबंधित संस्थाओं तक पहुंचना जरूरी है।


हालांकि, किसी वकील को केवल आरोप या चर्चा के आधार पर भ्रष्टाचार में शामिल मानना उचित नहीं होगा। इसके लिए ठोस तथ्य और जांच जरूरी है। जेठमलानी की टिप्पणी का मूल सवाल यही है कि अगर बार में किसी कथित ‘फिक्सर’ की भूमिका की जानकारी मौजूद है, तो उसे संबंधित संस्थागत तंत्र तक पहुंचाने में देरी क्यों हो?


अब निगाह इस बात पर है कि क्या ऐसी जानकारियां वास्तव में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम या जांच एजेंसियों तक पहुंचती हैं और यदि पहुंचती हैं, तो उन पर किस स्तर की कार्रवाई होती है।

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