सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों और ट्रिब्यूनल में जमा होने वाली रकम के प्रबंधन, निवेश, ब्याज और भुगतान की प्रक्रिया में एकरूपता लाने के लिए उपयुक्त कानून बनाने की जरूरत बताई है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने भारत के लॉ कमीशन से इस पूरे मुद्दे की विस्तृत जांच करने को कहा है।
मामला National Seeds Corporation Ltd. बनाम National Agro Seed Corporation (India) से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि अलग-अलग हाईकोर्ट में अदालत में जमा रकम को रखने और निवेश करने की व्यवस्था अलग-अलग है। कहीं रकम फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी जाती है, तो कहीं राष्ट्रीयकृत बैंकों या अन्य व्यवस्थाओं का इस्तेमाल होता है। जमा की जाने वाली राशि, ब्याज, निकासी, नवीनीकरण और पुनर्निवेश के नियमों में भी अंतर है।
कोर्ट के मुताबिक इस असमानता से समान परिस्थितियों वाले पक्षकारों के साथ अलग-अलग व्यवहार की स्थिति बन सकती है और रकम के निवेश, ब्याज तथा अकाउंटिंग को लेकर अतिरिक्त मुकदमेबाजी भी पैदा हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि एक कॉमन प्लेटफॉर्म बनाया जा सकता है, जहां अलग-अलग अदालतों और ट्रिब्यूनल में जमा रकम को एकीकृत व्यवस्था के तहत निवेश किया जाए। इससे ब्याज दरों में निश्चितता और प्रक्रिया में पारदर्शिता आने के साथ अदालतों पर प्रशासनिक बोझ भी कम हो सकता है।
लॉ कमीशन को दूसरे देशों में लागू व्यवस्थाओं का अध्ययन करने तथा RBI, वित्त मंत्रालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय से परामर्श करने को भी कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को फैसले की प्रति संबंधित अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया गया है।

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