पुलवामा हमले के आरोपी मोहम्मद इकबाल राथर को एनआईए अदालत से राहत नहीं, 10 दिन की अस्थायी रिहाई की मांग खारिज
जम्मू। पुलवामा आतंकी हमले की साजिश से जुड़े आरोपी मोहम्मद इकबाल राथर को अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए अस्थायी जमानत नहीं मिल सकी। जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने उसकी 10 दिन की अंतरिम रिहाई की मांग खारिज कर दी। राथर ने 5 से 10 सितंबर के बीच होने वाली बहन की शादी में शामिल होने के लिए अदालत से राहत मांगी थी।
अदालत के सामने राथर की ओर से पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अस्थायी रिहाई की मांग रखी गई थी। वह सात बहनों का इकलौता भाई बताया गया है। परिवार की ओर से शादी में उसकी मौजूदगी को महत्वपूर्ण बताया गया था।
हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामले को देखते हुए अदालत ने उसे जेल से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी। अदालत ने मानवीय पहलू को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया और उसे वीडियो माध्यम से बहन की शादी में शामिल होने की अनुमति दी।
राथर का नाम 2019 के पुलवामा हमले से जुड़े मामले में सामने आया था। 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 40 जवान शहीद हुए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले में आरोपियों और संदिग्धों की भूमिका की जांच लंबे समय से चलती रही है।
अदालत के फैसले ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि **आतंकवाद से जुड़े मामलों में व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियों तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच अदालतें किस तरह संतुलन बनाती हैं।**

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