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चीन की खनिज दादागिरी तोड़ने की तैयारी, भारत-अमेरिका साथ; क्या ट्रंप देंगे मोदी के प्लान को ताकत?

 


नई दिल्ली। चीन की महत्वपूर्ण खनिजों और उनसे जुड़ी वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर पकड़ के बीच भारत और अमेरिका ने रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक से इतर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट से मुलाकात की। दोनों ने महत्वपूर्ण खनिजों और सुरक्षित आपूर्ति शृंखलाओं के क्षेत्र में सहयोग और मजबूत करने पर सहमति जताई। 



इस साझेदारी का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि महत्वपूर्ण खनिज आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण और अत्याधुनिक तकनीक के लिए इनकी लगातार जरूरत बढ़ रही है। ऐसे में किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता रणनीतिक जोखिम बन सकती है।


दिलचस्प बात यह है कि जी20 बैठक में चीन के निर्यात मॉडल और गैर-बाजार नीतियों को लेकर अमेरिका समेत कई देशों में चिंता खुलकर सामने आई। चीन ने इस रुख का समर्थन नहीं किया। इसी माहौल में भारत-अमेरिका का महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग चीन के प्रभुत्व को चुनौती देने वाली बड़ी आर्थिक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। 


भारत पहले ही महत्वपूर्ण खनिजों की विदेशी आपूर्ति सुरक्षित करने और अपनी घरेलू क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। अब अमेरिका के साथ सहयोग से निवेश, तकनीक और वैकल्पिक आपूर्ति शृंखलाओं को गति मिल सकती है।


सीतारमण ने बेसेंट को इस साल के अंत में नई दिल्ली में आर्थिक एवं वित्तीय साझेदारी बैठक के लिए आमंत्रित किया है। 


**सवाल अब यह है—क्या मोदी सरकार की यह रणनीति चीन की खनिज बादशाहत को सचमुच चुनौती दे पाएगी और क्या ट्रंप प्रशासन इसमें भारत का सबसे बड़ा रणनीतिक साझेदार बनेगा?**

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