महाकाल की जमीन पर हाई कोर्ट का शिकंजा!

विधायक चिंतामणि मालवीय के निदेशक वाली ‘यूटोपिया होटल एंड रिसॉर्ट्स’ ने खरीदी 45 हजार वर्गफीट जमीन हाई कोर्ट ने सरकार और उज्जैन प्रशासन से मांगा जवाब

उज्जैन। विशेष रिपोर्ट | प्रणव बजाज

महाकाल की नगरी में जमीन का एक ऐसा मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है, जिसमें 1950 के सरकारी रिकॉर्ड से शुरू होकर 2026 की रजिस्ट्री तक की पूरी कड़ी सवालों के घेरे में है। इंदौर खंडपीठ ने 24 जुलाई 2026 को राज्य सरकार और उज्जैन प्रशासन के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।



याचिका में दावा है कि करीब 1.877 हेक्टेयर जमीन 1950 के राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थी। सवाल यह है कि अगर जमीन सरकारी थी तो बाद के वर्षों में निजी स्वामित्व में पहुंचने का रास्ता किस आदेश से खुला? रिकॉर्ड कब बदला और किस स्तर पर नामांतरण हुआ?


मामले की अगली कड़ी और भी महत्वपूर्ण है। ‘यूटोपिया होटल एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ का गठन 3 फरवरी 2026 को हुआ। उपलब्ध कंपनी रिकॉर्ड में उज्जैन भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय और इकबाल सिंह गांधी निदेशक दर्ज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने इसके महज 27 दिन बाद, 2 मार्च 2026 को करीब 45 हजार वर्गफीट जमीन ₹3.82 करोड़ में खरीदी।


याचिकाकर्ता ने इस जमीन का बाजार मूल्य करीब ₹12 करोड़ होने का दावा किया है। यह मूल्यांकन अभी अदालत द्वारा निर्धारित नहीं है।


प्रशासनिक स्तर पर उज्जैन संभागीय आयुक्त आशीष सिंह का नाम भी मामले की रिपोर्टिंग में सामने आया है, लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड में उन्हें जमीन बिक्री का आरोपी नहीं बताया गया है।


अब सवाल सीधा है—सरकारी रिकॉर्ड वाली जमीन निजी कैसे हुई? बिक्री से पहले राजस्व रिकॉर्ड की जांच किसने की? और कंपनी बनने के 27 दिन बाद इतनी महत्वपूर्ण जमीन की रजिस्ट्री कैसे हो गई?

मालवीय ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए गलत काम से इनकार किया है। मामला अभी हाई कोर्ट में विचाराधीन है।

बड़ा सवाल

सरकारी जमीन से निजी रजिस्ट्री तक—किस आदेश से बदला रिकॉर्ड?

Post a Comment

Previous Post Next Post