नई दिल्ली। किशोरियों में बढ़ते वजन, मेटाबॉलिक समस्याओं और मासिक धर्म की अनियमितता को लेकर AIIMS दिल्ली करीब 4,000 स्कूली छात्राओं पर अध्ययन कर रहा है। यह अध्ययन 2023 से चल रहा है और किशोरियों में पॉलीसिस्टिक ओवरी मेटाबॉलिक सिंड्रोम (PMOS), जिसे पहले PCOS कहा जाता था, से जुड़े जोखिमों को नए डायग्नोस्टिक मानकों के आधार पर समझने की कोशिश कर रहा है।
शुरुआती जानकारी में करीब हर पांचवीं छात्रा ने पीरियड्स में अनियमितता की जानकारी दी है। हालांकि डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि किशोरियों में अनियमित पीरियड्स अकेले PCOS का प्रमाण नहीं हैं। उम्र, पहली माहवारी को कितना समय हुआ है और अन्य हार्मोनल संकेतों को साथ देखकर ही स्थिति का आकलन किया जाता है।
AIIMS विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक मोबाइल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल सीधे PCOS पैदा नहीं करता, लेकिन इससे शारीरिक गतिविधि कम होना, नींद प्रभावित होना, लंबे समय तक बैठे रहना और स्क्रीन देखते हुए ज्यादा स्नैकिंग जैसी आदतें बढ़ सकती हैं, जो वजन और मेटाबॉलिक जोखिम से जुड़ी हैं।
किशोरियों में लगातार अनियमित माहवारी, चेहरे या शरीर पर ज्यादा बाल, गंभीर मुंहासे, पेट के आसपास तेजी से वजन बढ़ना या गर्दन की त्वचा का काला और मोटा होना जैसे संकेत दिखें तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। केवल अल्ट्रासाउंड में ओवरी का आकार देखकर किशोरी में PCOS का निदान नहीं किया जाना चाहिए।
संतुलित पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और डिजिटल स्क्रीन के संतुलित इस्तेमाल पर ध्यान देना इस उम्र में महत्वपूर्ण है।

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