इस्लामाबाद। जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित वैश्विक आतंकवादी मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान ने नया कदम उठाया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने उसे भगोड़ा घोषित करते हुए कथित तौर पर नया वारंट जारी किया है और उसकी गिरफ्तारी की सूचना देने वाले के लिए इनाम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया है। उसका नाम पाकिस्तान की नई रेड बुक में भी शामिल किया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि यह कार्रवाई ऐसे समय सामने आई है जब FATF की समीक्षा बैठक होने वाली है। FATF आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग पर देशों की कार्रवाई का आकलन करता है। ऐसे में पाकिस्तान की इस घोषणा ने उसकी मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या यह वास्तव में मसूद अजहर पर शिकंजा कसने की कार्रवाई है या अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने की कोशिश?
रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) की रेड बुक में मुंबई हमलों से जुड़े वांछित आतंकियों के नाम भी शामिल हैं। वहीं जैश-ए-मोहम्मद की कथित वित्तीय गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मसूद अजहर कोई नया नाम नहीं है। वह जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक और प्रमुख है तथा 2019 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवादी सूची में शामिल किया जा चुका है।
अब बड़ा सवाल यही है—अगर पाकिस्तान को मसूद अजहर वांछित आतंकवादी नजर आ रहा है, तो वह इतने वर्षों तक उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर सका? FATF की बैठक से ठीक पहले जारी यह वारंट क्या वास्तविक कार्रवाई की शुरुआत है या फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाने के लिए एक और कदम?

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