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रेल सुरक्षा और यात्री सुविधाओं पर बड़ा दांव, गुजरात से बंगाल तक 675 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी

 

नई दिल्ली। रेलवे नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए केंद्र ने अलग-अलग जोन में करोड़ों रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का फोकस सिर्फ ट्रेनों की आवाजाही बढ़ाने पर नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था, माल ढुलाई की क्षमता और यात्रियों की सुविधाओं को मजबूत करने पर भी है।



गुजरात के भावनगर पारा यार्ड के पुनर्निर्माण के लिए 125 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई है। यार्ड के आधुनिकीकरण से ट्रेनों के संचालन और माल ढुलाई की व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।


पश्चिम बंगाल में आद्रा और जॉयचंदीपहाड़ के बीच 272 करोड़ रुपये की लागत से बाईपास लाइन बनाई जाएगी। इसका बड़ा उद्देश्य मालगाड़ियों की आवाजाही को सुगम बनाना और मौजूदा रेल मार्ग पर दबाव कम करना है। इससे माल परिवहन की क्षमता बढ़ने की संभावना है।


उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मंडल में ट्रेन टक्कर रोकने वाली स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली कवच 4.0 के विस्तार के लिए 170 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। यह परियोजना रेल संचालन को तकनीकी रूप से ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।


वहीं बिहार के समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली लगाने के लिए 233 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह व्यवस्था सिग्नल और ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद करती है।


इन परियोजनाओं पर कुल 800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च का प्रावधान बनता है। ऐसे में दिए गए आंकड़ों में 675 करोड़ रुपये का दावा मेल नहीं खाता—यह अंतर खबर के मूल आंकड़ों में जांचने योग्य है।

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