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झुग्गी मुक्त भोपाल का दावा, लेकिन 6,060 फ्लैटों के बीच 35 हजार लोगों का सवाल—कहां जाएंगे बाणगंगा के रहवासी?


भोपाल की बाणगंगा क्षेत्र की झुग्गी बस्तियों को लेकर इन-सिचू स्लम रीडेवलपमेंट (ISSR) योजना ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। योजना के तहत करीब 24 हेक्टेयर जमीन पर 6,060 EWS फ्लैट बनाए जाने की बात सामने आई है। प्रस्तावित पुनर्विकास से बस्तियों में रहने वाले करीब 35 हजार लोगों के विस्थापन की चिंता सामने आ रही है।



सरकारी योजना का उद्देश्य झुग्गी बस्तियों का पुनर्विकास कर पात्र परिवारों को बेहतर आवास उपलब्ध कराना है। लेकिन बाणगंगा के मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्माण अवधि के दौरान मौजूदा रहवासी कहां रहेंगे और उन्हें पुनर्वास की क्या व्यवस्था मिलेगी।


इन-सिचू मॉडल में सामान्यतः उसी क्षेत्र में पुनर्विकास कर पात्र झुग्गीवासियों को आवास देने की व्यवस्था होती है। ऐसे में योजना की सफलता केवल नए फ्लैट बनाने से नहीं, बल्कि पात्रता, अस्थायी पुनर्वास, मकान आवंटन और मौजूदा रहवासियों के अधिकार स्पष्ट होने से तय होगी।


करीब 35 हजार आबादी के सामने यह भी सवाल है कि सभी मौजूदा परिवारों का सर्वे कैसे होगा और कितने परिवार नए आवास के पात्र माने जाएंगे। यदि निर्माण के दौरान लोगों को हटाया जाता है तो वैकल्पिक आवास और किराये की व्यवस्था कौन करेगा—यह भी महत्वपूर्ण मुद्दा है।


भोपाल को झुग्गी मुक्त बनाने की योजना विकास की तस्वीर पेश करती है, लेकिन 24 हेक्टेयर जमीन पर 6,060 फ्लैटों के साथ 35 हजार लोगों के पुनर्वास का रोडमैप क्या है, इसका स्पष्ट जवाब ही इस परियोजना की असली परीक्षा होगा।

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