नई दिल्ली। राजधानी में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए एक और बड़े रिंग रोड प्रोजेक्ट की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित करीब 55 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ते हुए वाहनों के लिए वैकल्पिक तेज मार्ग उपलब्ध कराने की योजना का हिस्सा है। परियोजना को करीब छह चरणों में विकसित किए जाने की बात सामने आई है।
इस कॉरिडोर का उद्देश्य शहर के व्यस्त हिस्सों में सड़क पर वाहनों का दबाव घटाना और ऐसे ट्रैफिक को अलग मार्ग देना है, जिसे दिल्ली के अंदरूनी हिस्सों से होकर गुजरने की जरूरत नहीं है। एलिवेटेड मार्ग बनने से प्रमुख जंक्शनों और व्यस्त सड़कों पर पीक ऑवर के दौरान दबाव कम होने की उम्मीद है।
परियोजना की योजना में चरणबद्ध निर्माण का मॉडल अपनाया जा रहा है, ताकि पूरे कॉरिडोर के लिए एक साथ जमीन, निर्माण और यातायात प्रबंधन की चुनौती न खड़ी हो। हालांकि परियोजना की अंतिम लागत, निर्माण की समयसीमा, इंटरचेंज की संख्या और प्रत्येक चरण का विस्तृत रूट आधिकारिक मंजूरी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
दिल्ली में पहले से मौजूद रिंग रोड और आउटर रिंग रोड पर भारी यातायात दबाव रहता है। ऐसे में नया एलिवेटेड कॉरिडोर केवल सड़क बढ़ाने की परियोजना नहीं, बल्कि राजधानी के ट्रैफिक नेटवर्क को कई स्तरों पर बांटने की कोशिश है।
अब बड़ा सवाल यही है कि 55 किलोमीटर के इस प्रस्तावित कॉरिडोर से वास्तव में कितने इलाकों का जाम कम होगा और निर्माण के दौरान खुद यातायात व्यवस्था पर कितना दबाव पड़ेगा। परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसके इंटरचेंज, कनेक्टिंग रोड और मौजूदा सड़कों के साथ इसका तालमेल कितना प्रभावी बनाया जाता है।

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