भूमिगत मेट्रो के खिलाफ इंदौर में रहवासियों का कैंडल मार्च, 50-60 साल पुराने मकानों और बोरिंग पर असर की आशंका



इंदौर। इंदौर में मेट्रो का विस्तार विकास की तस्वीर दिखा रहा है, लेकिन प्रस्तावित भूमिगत रूट ने रिहायशी इलाकों के लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है। बंगाली चौराहे से रीगल तक प्रस्तावित भूमिगत मेट्रो के विरोध में तिलक नगर, गोयल नगर, साईंनाथ कॉलोनी, महावीर नगर और आसपास के रहवासी रविवार रात सड़क पर उतर आए। बंगाली चौराहे पर कैंडल मार्च निकालकर लोगों ने विरोध दर्ज कराया और मेट्रो कार्यालय के बाहर दीप जलाए।


रहवासियों का कहना है कि उनका विरोध मेट्रो परियोजना से नहीं, बल्कि घनी आबादी के नीचे से सुरंग निकालने के प्रस्तावित रास्ते से है। लोगों ने दावा किया कि इलाके में बड़ी संख्या में 50 से 60 साल पुराने मकान हैं। उनका सवाल है कि भूमिगत निर्माण के दौरान होने वाले कंपन और जमीन में बदलाव का इन पुराने भवनों की नींव पर क्या असर पड़ेगा।


एक दूसरी बड़ी चिंता घरेलू बोरिंग को लेकर सामने आई है। रहवासियों के अनुसार तिलक नगर और आसपास के कई परिवार पानी के लिए बोरिंग पर निर्भर हैं। टनल बोरिंग मशीन से निर्माण के दौरान भूमिगत जलस्रोतों और मौजूदा बोरिंग पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। हालांकि इन आशंकाओं की तकनीकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।


आंदोलनकारियों ने प्रस्तावित रूट का वैकल्पिक तकनीकी अध्ययन कराने, रहवासियों से संवाद करने और लिखित आश्वासन देने की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान टेंडर की प्रति फाड़कर भी विरोध जताया गया। रहवासियों का कहना है कि जब तक उनकी आपत्तियों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।

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