इंदौर । कैंसर मरीजों के इलाज के लिए करोड़ों रुपये की लागत से लगाई जा रही अत्याधुनिक लीनियर एक्सेलेरेटर मशीन अभी मरीजों के काम भी नहीं आई और उससे पहले ही उसकी सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। इंदौर के कैंसर अस्पताल में बारिश के दौरान भवन की छत से पानी टपकने और मशीन के बक्सों के भीगने की तस्वीरें सामने आई हैं।
बताया जा रहा है कि अस्पताल भवन के निर्माण का काम पीडब्ल्यूडी की पीआईयू यूनिट द्वारा कराया जा रहा है। ऐसे में निर्माणाधीन भवन में बारिश का पानी पहुंचना सीधे तौर पर निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस मशीन की कीमत करीब 43 करोड़ रुपये बताई जा रही है, उसके पैकेजिंग बॉक्स तक पानी पहुंच गया।
लीनियर एक्सेलेरेटर कैंसर के रेडिएशन उपचार में इस्तेमाल होने वाली बेहद संवेदनशील और महंगी चिकित्सा प्रणाली है। ऐसे उपकरण को स्थापित करने से पहले भवन में नमी, पानी की निकासी, विद्युत व्यवस्था और पर्यावरणीय सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं का मानकों के अनुरूप होना जरूरी है।
अब सवाल केवल पानी टपकने का नहीं है—यदि करोड़ों की मशीन स्थापना से पहले ही बारिश के पानी की चपेट में आ रही है, तो मरीजों के इलाज के दौरान अस्पताल की निर्माण गुणवत्ता कितनी भरोसेमंद होगी?
पीडब्ल्यूडी की पीआईयू को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पानी मशीन तक कैसे पहुंचा, पैकेजिंग में रखे उपकरण को कितना नुकसान हुआ और इसकी जिम्मेदारी किसकी तय की गई है। साथ ही मशीन की तकनीकी जांच कराकर यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि बारिश के पानी से उसके किसी हिस्से की सुरक्षा प्रभावित हुई है या नहीं।
करोड़ों की मशीन और सरकारी निर्माण—दोनों की सुरक्षा में यदि ऐसी लापरवाही सामने आती है, तो इसे महज बारिश की समस्या कहकर टालना मरीजों के साथ अन्याय होगा।

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