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42 साल में वित्त मंत्रालय की अलग तस्वीर: कई मंत्री लोकसभा चुनाव से रहे दूर, अरुण जेटली चुनाव हारकर भी बने वित्त मंत्री

नई दिल्ली । बौद्धिक प्रतिकार



देश का वित्त मंत्रालय ऐसा विभाग है जिसके फैसलों का सीधा असर टैक्स, महंगाई, सरकारी खर्च और आम लोगों की आर्थिक जिंदगी पर पड़ता है। लेकिन पिछले करीब चार दशकों के राजनीतिक इतिहास में इस मंत्रालय की कमान संभालने वाले कई नेता सीधे लोकसभा चुनाव जीतकर नहीं आए। वित्त मंत्रालय के सरकारी रिकॉर्ड में 1982 से अब तक प्रणब मुखर्जी, वी.पी. सिंह, राजीव गांधी, एन.डी. तिवारी, एस.बी. चव्हाण, मदु दंडवते, यशवंत सिन्हा, मनमोहन सिंह, पी. चिदंबरम, जसवंत सिंह, अरुण जेटली और निर्मला सीतारमण समेत कई नाम दर्ज हैं।


इस सूची में राज्यसभा के रास्ते संसद पहुंचने वाले नेताओं की भूमिका खास तौर पर दिखाई देती है। मनमोहन सिंह लंबे समय तक राज्यसभा सदस्य रहे और प्रधानमंत्री बनने के बाद भी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। निर्मला सीतारमण भी राज्यसभा सदस्य रहते हुए 2019 से वित्त मंत्री हैं। जसवंत सिंह और अरुण जेटली का भी राष्ट्रीय राजनीतिक सफर राज्यसभा से जुड़ा रहा।


वहीं अरुण जेटली का मामला अलग रहा। उन्होंने 2014 में अमृतसर से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बावजूद नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली।


इसलिए इस इतिहास को केवल “जनता से दूरी” के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। संविधान के तहत केंद्रीय मंत्री का लोकसभा सदस्य होना अनिवार्य नहीं है; राज्यसभा सदस्य भी केंद्रीय मंत्री बन सकता है। यही वजह है कि देश के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक मंत्रालय की कमान कई बार ऐसे नेताओं को मिली, जिनका संसदीय प्रवेश लोकसभा चुनाव के बजाय राज्यसभा के रास्ते हुआ।

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