ग्वालियर राजघराने की करीब 41 हजार करोड़ रुपये की बताई जा रही संपत्तियों के बंटवारे का विवाद अब अदालत में नए मोड़ पर पहुंच गया है। प्रतिमा देवी की ओर से संपत्ति में अपने अधिकार को लेकर दायर आपत्ति को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही मामले में उनके दावे और संपत्ति के अधिकार से जुड़े पहलुओं पर सुनवाई का रास्ता खुल गया है।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सिंधिया परिवार की ऐतिहासिक चल-अचल संपत्तियों, उनके स्वामित्व और उत्तराधिकार को लेकर लंबे समय से अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। प्रतिमा देवी की आपत्ति स्वीकार होने के बाद अब अदालत के सामने यह सवाल होगा कि संबंधित संपत्तियों में उनका कानूनी अधिकार किस आधार पर बनता है और पूर्व में संपत्ति के बंटवारे अथवा दावों में उनकी स्थिति को किस तरह देखा गया।
अब अगली सुनवाई में दस्तावेज, उत्तराधिकार और संपत्ति पर अधिकार से जुड़े तर्क सामने रखे जाएंगे। अदालत का फैसला इस विवाद की दिशा तय करने में अहम हो सकता है।
41 हजार करोड़ का आंकड़ा मीडिया रिपोर्टों में बताई गई अनुमानित संपत्ति से जुड़ा है; वास्तविक संपत्ति का मूल्य और स्वामित्व अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

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