नई दिल्ली। भारत अब केवल हाई-स्पीड रेल चलाने की तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि देश में ही ऐसी बुलेट ट्रेन विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसकी रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचाने का लक्ष्य है। यह परियोजना सफल होती है तो भारत उन चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो सकता है, जो हाई-स्पीड ट्रेन तकनीक में खुद डिजाइन और निर्माण की क्षमता रखते हैं।
भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर जापानी तकनीक की Shinkansen प्रणाली इस्तेमाल की जा रही है। इसी अनुभव के आधार पर भविष्य में स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन विकसित करने की दिशा में काम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जापान की अगली पीढ़ी की E10 Shinkansen को भी करीब 320 किमी/घंटे की परिचालन गति के लिए विकसित किया जा रहा है। ऐसे में 350 किमी/घंटे की लक्षित रफ्तार वाली भारतीय ट्रेन तकनीकी क्षमता के लिहाज से एक बड़ा कदम होगी।
लेकिन सवाल केवल रफ्तार का नहीं है। 350 किमी/घंटे की ट्रेन के लिए ट्रैक, सिग्नलिंग, सुरक्षा प्रणाली, एयरोडायनामिक्स, ब्रेकिंग और रखरखाव की पूरी व्यवस्था भी उसी स्तर की चाहिए। इसलिए ‘मेड इन इंडिया’ बुलेट ट्रेन का असली इम्तिहान स्पीड के साथ सुरक्षा, विश्वसनीयता और बड़े पैमाने पर उत्पादन होगा।
भारत के लिए यह परियोजना हाई-स्पीड रेल में विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने और घरेलू रेल विनिर्माण को नई तकनीकी ऊंचाई देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

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