नई दिल्ली। ट्रैफिक नियम तोड़ने के बाद जारी होने वाले ई-चालानों की वसूली अब बड़ी चुनौती बन गई है। इसी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बकाया चालानों की रकम वसूलने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया, जिनमें बिजली बिल के साथ बकाया ट्रैफिक जुर्माना जोड़ने का सुझाव भी शामिल है। हालांकि अभी ऐसा कोई आदेश लागू नहीं किया गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केवल हजारों-लाखों ई-चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है। असली सवाल उनकी रकम की वसूली का है। इसी के तहत बकाया चालान वाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण, स्वामित्व हस्तांतरण, पीयूसी और अन्य सुविधाओं को रोकने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हुई।
2024 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में करीब 2,386 करोड़ रुपये और बिहार में 331 करोड़ रुपये के ट्रैफिक चालान बकाया बताए गए थे। देशभर में लंबित ई-चालानों की राशि भी हजारों करोड़ रुपये में है।
अगर भविष्य में बिजली बिल से चालान जोड़ने जैसी व्यवस्था लागू होती है तो वाहन मालिकों के लिए ट्रैफिक जुर्माना नजरअंदाज करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि फिलहाल इसे सिर्फ अदालत में सामने आया सुझाव माना जाना चाहिए। बिजली विभागों को चालान वसूली की जिम्मेदारी देने या हर बिजली उपभोक्ता के बिल में वाहन का बकाया जोड़ने का कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
मामला अब इस बड़े सवाल पर टिकता है कि ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों से जुर्माना वसूलने का प्रभावी और कानूनी तरीका क्या हो।

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