मुंबई।
महाराष्ट्र में सूखे का संकट गहराने के बीच सरकारी खर्च को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित किया गया है। इसी दौरान लोकायुक्त संस्था के चार नए सदस्यों के लिए महंगी गाड़ियां खरीदने को सरकारी मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
सरकार की ओर से जारी मंजूरी के मुताबिक लोकायुक्त संस्था के चार सदस्यों के लिए प्रत्येक वाहन पर करीब 33 लाख रुपये, यानी कुल लगभग 1.32 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे पहले सामने आई जानकारी में वाहन की कीमत करीब 30 लाख रुपये बताई गई थी, जबकि बाद की मंजूरी में कर और अन्य शुल्क जोड़ने के बाद प्रति वाहन खर्च लगभग 33 लाख रुपये बताया गया है।
विवाद इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि सूखे के बीच सरकार की ओर से लोगों से अनावश्यक खर्च कम करने और संकटग्रस्त क्षेत्रों की मदद करने की अपील की गई है। दूसरी तरफ सरकारी संस्थान के लिए महंगे वाहनों पर इतनी बड़ी राशि खर्च करने का फैसला सवाल खड़े कर रहा है।
लोकायुक्त संस्था में अगस्त में चार नए सदस्यों की नियुक्ति हुई थी। इसके बाद वाहन व्यवस्था में भी विस्तार किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पहले कार्यालय के लिए चार वाहन स्वीकृत थे, जिन्हें बढ़ाकर सात किया गया है।
अब सवाल यही है कि जब सरकार सूखे के बीच हर रुपये को राहत और पानी की जरूरत से जोड़ रही है, तब महंगे सरकारी वाहनों पर खर्च की प्राथमिकता कैसे तय हुई?

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