गांधीनगर। 24 सितंबर 2002 की शाम गुजरात के गांधीनगर स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर परिसर में अचानक गोलियों और हथगोले की आवाज गूंजने लगी। दो हथियारबंद आतंकियों ने मंदिर परिसर में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार दोनों के पास AK-56 राइफलें और हथगोले थे। हमले में 33 लोगों की मौत हुई और 85 से अधिक लोग घायल हुए।
हमले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) की टास्क फोर्स को दिल्ली से गांधीनगर रवाना किया गया। NSG के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक कमांडो दस्ते ने मंदिर परिसर की घेराबंदी संभाली और आतंकियों को अलग-अलग हिस्सों में तलाशने के लिए पांच छोटी टुकड़ियों में अभियान चलाया। आधी रात के आसपास आतंकियों से पहला संपर्क हुआ, लेकिन मंदिर का बड़ा परिसर और अंधेरा उनके लिए चुनौती बना रहा।
25 सितंबर की सुबह अभियान निर्णायक मोड़ पर पहुंचा। NSG के अधिकारी सुरेश चंद यादव ने एक आतंकी को बेहद नजदीक जाकर मार गिराया, लेकिन इस दौरान वह भी गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। इसके बाद दूसरी टुकड़ी ने दूसरे आतंकी को भी मार गिराया। NSG ने इस पूरे अभियान को ‘ऑपरेशन वज्र शक्ति’ नाम दिया था।
मंदिर परिसर से हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया तथा भीतर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। अक्षरधाम हमला आज भी गुजरात के सबसे भयावह आतंकी हमलों में दर्ज है।

Post a Comment