नई दिल्ली। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के एक कमांडेंट को करीब 3,000 किलोमीटर दूर अटैच किए जाने का मामला विवादों में आ गया है। अधिकारी ने इस कार्रवाई को सामान्य प्रशासनिक तबादला मानने के बजाय इसे ‘खुली गिरफ्तारी’ जैसा बताया है। उन्होंने मामले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के उप महानिरीक्षक (सतर्कता) के खिलाफ राष्ट्रपति से शिकायत भी की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कमांडेंट का आरोप है कि उन्हें ऐसी जगह भेजा गया है, जहां उनकी आवाजाही और कामकाज पर गंभीर प्रतिबंध जैसा प्रभाव पड़ रहा है। अधिकारी ने अपनी शिकायत में कार्रवाई के पीछे की परिस्थितियों और सतर्कता शाखा की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह कदम उनके खिलाफ दबाव बनाने की कार्रवाई के तौर पर देखा जा सकता है।
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में अधिकारियों की तैनाती और स्थानांतरण प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन यदि किसी अधिकारी को दंडात्मक मंशा से दूर भेजा गया हो तो उसके औचित्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब नजर इस बात पर है कि राष्ट्रपति कार्यालय और संबंधित केंद्रीय प्राधिकरण शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सीआरपीएफ इस अधिकारी द्वारा लगाए गए आरोपों पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है।
पूरे विवाद का मूल प्रश्न यही है—क्या यह महज प्रशासनिक अटैचमेंट है या किसी अधिकारी पर दबाव बनाने की कार्रवाई? इसका जवाब शिकायत की जांच और सीआरपीएफ के आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट होगा।

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